कैथोलिक मानव-
इस मानव का नामकरण प्रयोग के आधार पर किया गया जिस मानव ने सर्वप्रथम पाषाण, तांबा और लोहे का प्रयोग एक साथ प्रारंभ किया उस मानव को कैथोलिक मानव के नाम से जाना गया और यह समय कैथोलिक युग कहलाया।यह युग 180000 ईसा पूर्व में इतिहासकारों द्वारा निश्चित किया गया है।
एचुलियन कुल्हाड़ी
फ्रांस में एक एचूलिया नामक स्थान से लोहे की सबसे प्राचीन कुल्हाड़ी का साक्ष्य प्राप्त हुआ। यह कुल्हाड़ी एचुलियन कुल्हाड़ी के नाम से जानी गई। कार्बन 14 विधि से जब इसके उम्र की गणना की गई तो यह 184000 ईसा पूर्व की निश्चित हुई। विश्व में लोहे की सबसे प्राचीनतम साक्ष्य है।
इतिहास में किसी वस्तु के उम्र ज्ञात करने की निम्न विधियां हैं-
1.स्तरीकरण विधि( Stratographic Method)
इतिहासकारों के आम धारणा यह है कि किसी वस्तु को एक स्थान विशेष पर अगर 500 वर्षों के लिए रख दिया जाए तो उस वस्तु के ऊपर 5 इंच का मोटा स्तर जम जाता है। अगर किसी पुरातात्विक वस्तु के लिए वास्तविक गहराई का पता हो तो हंसकर की संख्या में 500 से गुणा करके अभीप्सित वस्तु की उम्र ज्ञात की जा सकती है।
वस्त्रोफिदान लिपि
आद्य इतिहास की लिपि का नामकरण प्रोफेसर बीबी लाल ने किया था। यह लिपि बाएं से दाएं ऊपर से नीचे दाएं से बाएं ऊपर से नीचे पुनः बाएं से दाएं के क्रम में लिखी गयी है। प्रोफ़ेसर बी॰बी॰ लाल ने इसे वस्त्रोफिदान लिपि कहा, क्योंकि यह लिपि वस्त्र के समान जगह-जगह मुड़ी हुई थी। इसी लिपि को आंग्ल भारतीय भाषा में पेक्टोग्राफिक लैंग्वेज कहते हैं।
पाषाणकाल
- पुरापाषाण काल(2600000, ईसापूर्व से 10000 ईसा पूर्व)
।.निम्न पुरापाषाण काल
॥.मध्य पुरापाषाणकाल
॥।. नव पुरापाषाणकाल
- मध्य पाषाण काल (10000 ईसा पूर्व से 7000 ईसा पूर्व )
- उत्तर पाषाण काल (7000 ईसा पूर्व से 3000 ईसा पूर्व)
1.पुरापाषाण काल
।.निम्नपुरापाषाण
- निम्न पुरापाषाण काल किस काल में मानव ने सर्वप्रथम क्वार्टरजाइट नामक पत्थर का प्रयोग किया।
- इस काल में मानव ने शिकार की असुविधा को दूर करने के लिए समूह या समुदाय में रहना प्रारंभ किया।
- इस काल में मानव ने आग की खोज की। इस काल में मानव ने सतीश सर्दी से अपनी रक्षा के लिए अग्नि वाला यानी रिंग ऑफ फायर का प्रयोग किया था।
- जम्मू कश्मीर के बुर्ज होम और गुप्तकराल नामक स्थलों से वार्तावास के साक्ष्य मिले हैं अर्थात मानव गर्मी से अपनी रक्षा के लिए गर्तावास का प्रयोग करता था।
- इस काल में भीमबेटका आदि स्थलों को गुहा बात के साक्ष्य मिले हैं।
- वर्षा ऋतु में गुफा के अंदर निवास करने के उद्देश्य से मानव ने आग का व्यवसायिक प्रयोग सीखा जाए से मशाल जलाने और मांस को भूनकर खाना आदि।
- इस काल में मानव ने भित्तिचित्र बनाना प्रारंभ किया यह चित्र नारी पुरुष चित्र सहवास, दूध पिलाती महिला का चित्र और स्त्री योनि से निकलता हुआ वृक्ष इसमें समाहित था।
- किस काल में मानव ने क्वार्टरजाइट के स्थान पर जैस्पर नामक पत्थर का प्रयोग किया।
- इस काल में मानव ने यह महसूस किया कि बड़े पत्थरों की अपेक्षा छोटे किंतु धारदार छोटे नुकीले हथियार अधिक घातक होते हैं इसलिए मानव ने पत्थरों से पत्थरों को लड़ा कर धारदार नुकीले हथियार बनाने का प्रारंभ कर दिया। इस प्रकार फ्लिक तकनीक का विकास हुआ।
- इस काल में मानव ने पेबुल पत्थर का प्रयोग भी करता था।
- इस काल में मानव जैस्पर पत्थरों का ही प्रयोग करता रहा
- इसी काल में मानव समूह परिश्रम के आधार पर नारी और पुरुष में विभाजित हुआ और पुरुष खाद्य संग्राहक और नारी व्यवस्थापिका बनी।
- इस काल में मानव ने यह महसूस किया कि बड़े पत्थरों के अपेक्षा छोटे किंतु धारदार और चिकने हथियार अधिक घातक होते है इसलिए मानव ने पत्थरों से पत्थरों को रगड़ कर धारदार हथियार बनाए। इस प्रकार का पर चापर-चापिंग पद्धति का विकास हुआ तथा मानव हैंडएक्स का प्रयोग करने लगा।
- इसी काल में ढाल, तलवार, भाला, बरछी आदि का भी प्रयोग होने लगा।
- किस काल में मानव ने सर्वप्रथम प्रक्षेपास्त्र तकनीक(मिसाइल टेक्नोलॉजी)के अंतर्गत धनुष बाण का प्रयोग प्रारंभ किया।
- इसी काल में मानव ने प्रकृति प्रदत्त अन्न-जौ का संग्रह सर्वप्रथम प्रारंभ किया।
- इसी काल में मानव ने सर्वप्रथम कुत्ते को पालतू पशु बनाया। इसके बाद भेड़ बकरी घोड़ा और अंततः गाय को पालतू पशु बनाया गया।
- इसी काल में मानव ने जानवरों की पतली हड्डियों की सूई बनाई और जानवरों की खाल के किनारे को भागों को काटकर धागे के रूप में इस्तेमाल किया और इस प्रकार जानवरों की खाल से बना वस्त्र मानव ने प्रयोग करना प्रारंभ किया।
- इस काल में मजबूती के आधार पर कुछ इतिहासकारों ने वस्त्रो को अल्पकालीन और दीर्घकालीन में क्रमशः विभाजित किया।
- वस्त्र- नीवी- कमर में पहनी जाती थी और अधिवास-वक्ष भाग पर लपेटा जाता था।







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